सहरिया
: सामान्य
जानकारी
राजस्थान
में बारां
जिले के
सहरिया
किशनगंज एवं
शाहबाद क्षेत्र
में सहरिया आदिम
जाति के लोग
सघन रूप से
निवास करते
है। इस आदिम
जाति (Primitive Tribe) को
सहरिया इसलिए
कहते है। क्योकि
यह जंगलों में
रहते है। ‘’सहरा’’ फारसी
में जंगल को
कहते है। और
सहरा (जंगल) पर
निर्भर करने
वालों को
सहरिया कहा जाने
लगा। यहां की
भाषा बुन्देलखण्ड
से मिलती है। ये
सीताबाडी को
अपना धार्मिक
स्थल मानते
है। एवं ऋषि
बाल्मिकी को
अपना गुरू
मानते है। सहरिया
जनजाति का कोई
सदस्य भिक्षावृत्ति
नही करता है।
बारॉ
जिले में
सहरिया चार तहसीलों
में निवास
करते है। परन्तु
मुख्यत:
शाहबाद एवं
किशनगंज
तहसीलों में
सहरिया समुदाय
अधिक संख्या
में निवास
करते है।
तहसीलवार
जनसंख्या
निम्नप्रकार
है :-
|
क्रसं. |
तहसील |
सहरिया
गांव |
सहरियाओं
के घर |
कुल
जनसंख्या |
|
1 |
किशनगंज |
136 |
8236 |
39308 |
|
2 |
शाहबाद |
100 |
7119 |
34687 |
|
3 |
अटरू |
28 |
732 |
3416 |
|
4 |
मांगरोल |
19 |
433 |
1961 |
|
|
योग |
283 |
16520 |
79372 |
(संदर्भ
: सर्वेक्षण
वर्ष 2002 जनजाति
रिसर्च एवं प्रशिक्षण
केन्द्र,
उदयपुर
द्वारा)
जिला
प्रशासन
बारां द्वारा वर्ष
2007 में करवाये
गये ट्रेकिंग
सर्वे के
अनुसार
सहरिया
परिवारों की
संख्या निम्नानुसार
है :-
|
क्रसं. |
तहसील |
सहरिया
गांव |
सहरियाओं
के परिवार |
|
1 |
किशनगंज |
143 |
9023 |
|
2 |
शाहबाद |
103 |
9331 |
|
|
योग |
246 |
18354 |
उपरोक्त
सहरिया
परिवारों में
साक्षरता
निम्नानुसार
है:-
आदिम जाति
सहरिया
परिवारों की साक्षरता
दर
|
|
6 वर्ष से
अधिक आबादी |
शिक्षित
व्यक्ति |
अषिक्षित
व्यक्ति |
साक्षरता
दर |
|
पुरूष |
31224 |
10005 |
21234 |
32.03 |
|
स्त्री |
29769 |
4227 |
25542 |
14.2 |
|
योग |
61008 |
14232 |
46776 |
23.33 |
सहरिया
आदिम जाति के
आर्थिक,
सामाजिक एवं
शैक्षिक उत्थान
एवं विकास के
लिए वर्ष 1977-78 से
जनजाति
क्षेत्रिय
विकास विभाग,
उदयपुर के माध्यम
से सहरिया
विकास
कार्यक्रम
अन्तर्गत
भारत सरकार
एवं राज्य
सरकार के
सहयोग से बारॉ
जिले की
पंचायत समिति
शाहबाद एवं
किशनगंज विगत
वर्षो में
अनेक योजनाओं
का संचालन एवं
क्रियान्वयन
किया गया है।
इन योजनाओं
हेतु भारत
सरकार एवं
राज्य सरकार
से प्राप्त
राशि एवं व्यय
का विवरण
परिशिष्ट ‘अ’ पर
संलग्न है। वर्तमान
में संचालित
की जा रही
प्रमुख योजनाओं
का विवरण आगे
दिया जा रहा
है।